Poetry

Maraasim

शायरी की शक्ल में
हाल-ए-दिल, भिजवाता रहूँगा
तेरी यादों से बड़े मरासिम हैं
मै आता जाता रहूँगा

Aye Nazar

पलकों में पिघले सपनों का मलबा
अब जो सख़्त हो चला है
ए नज़र ज़रा बाहर देख के बता
शायद उसकी यादों का वक़्त हो चला है

Ashq

वीरानों से मुहब्बत की है
तनहाइयों को जिया है मैने
हर कतरा महफ़ूज़ रखा है
कब अश्क़ बहने दिया है मैने

Tumhaare Lab

तुम्हें देखते ही जैसे शरारत से भर जातीं हैं
ये हवाएँ जो ज़ुल्फ़ें हटाते हुए, लब खिलातीं हैं

Jugnoo

धूप होगी सारा दिन
हम भी ग़म छुपाएँगे
शाम होते ही पलकों के
जुगनू जाग जाएँगे

Chhuan

ये जो मै एक मुट्ठी सी नहीं खोलता कभी
इसमें उसके चेहरे की छुअन जमा है

Ishqa meiN

इश्क़ में गुज़रे हुए तमाम लम्हे
हासिल-ए-ज़िंदगी साबित हुए
तुमने जो दुनियादारी सिखा दी
हम भी नादानियों से वाक़िफ़ हुए

Shaayari

मुद्दतों से ज़माने के दबे कुचले
ख़यालात को रास्ता हो जाता है
शायरी ज़माने को ख़ुश रखती हैं
और मेरा दिल हल्का हो जाता हैं

YouN teraa intzaar kiyaa

गुज़रे पुराने लमहे चुनेयादों को चमकदार कियाएक उम्र गुज़ारी है ऐसेयूँ तेरा इंतज़ार किया Guzare puraane lamhe chune YaadoN ko chamakdaar kiyaaEk umra guzaari hai aise YouN tera intzaar kiyaa