prashant

Aa Chukaa Hoon Mai

आख़िरी अश्क़ कल शब बहा चुका हूँ मैदामन की नमी को अब सुखा चुका हूँ मैअब हर सितम के बदले, फ़क़त यलगार होगाकह दो दुनिया-ए-फ़ानी से, आ चुका हूँ मै