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Yaa Kinara KareiN

तुम्हें किस तरहा से पुकारा करें
कोई नाम लें या इशारा करें
तुम्हारी आँखों से जो रिश्ते हो चले हैं
डूब के जाँ बचाएँ, या किनारा करें

Kitne Khayaal Muntshir HaiN

कितने ख़याल मुन्तशिर
कितने ख़याल मुन्तशिर हैं
मेरे छत की मुँडेर पर
वो गली से गुज़रती है
मै देखता सोचता रहता हूँ

Bekhayaali

बेख़याली का आलम जब हो
पैरों में आसमान हो जाता है
जिसे इश्क़ नहीं भी हुआ हो
उसे भी इश्क़ का गुमान हो जाता है

रस्म

बाक़ायदा मेरे ग़मों की
हर शाम बज़्म होती है
जिसमें तेरी यादें दोहराना
एक लाज़मी सी रस्म होती है

Daur-e-hijraaN

दौर-ए-हिज्रां में कभी, वस्ल-ए-मुख्तसर भी हो
लाख काँटों में कोई गुल सा मुअत्तर भी हो

Masroof

ये सच है के
कुछ दिनों से
मसरूफ़ रहा हूँ मै
मगर ये इल्ज़ाम
ग़लत है के
तुम्हें भूल गया हूँ मै