रस्म

बाक़ायदा मेरे ग़मों की
हर शाम बज़्म होती है
जिसमें तेरी यादें दोहराना
एक लाज़मी सी रस्म होती है

Daur-e-hijraaN

दौर-ए-हिज्रां में कभी, वस्ल-ए-मुख्तसर भी हो
लाख काँटों में कोई गुल सा मुअत्तर भी हो

Musafiri

Just Landed…

मयखाने से

ये शहर तेज़ तर्रार है
चलता है आगे ज़माने से
अपनी तैयारी पूरी है
ले आओ सौदा मैखाने से

रस्म

बाक़ायदा मेरे ग़मों की
हर शाम बज़्म होती है
जिसमें तेरी यादें दोहराना
एक लाज़मी सी रस्म होती है

Daur-e-hijraaN

दौर-ए-हिज्रां में कभी, वस्ल-ए-मुख्तसर भी हो
लाख काँटों में कोई गुल सा मुअत्तर भी हो

Masroof

ये सच है के
कुछ दिनों से
मसरूफ़ रहा हूँ मै
मगर ये इल्ज़ाम
ग़लत है के
तुम्हें भूल गया हूँ मै

UdaasiyoN

आम दिनों से ज़्यादा गहरे ज़्यादा सुर्ख़ होते हैं
तुम ने उदास चेहरों के रंग पढ़े हैं कभी

Bangaali AankheiN

क़ातिलाना, मेहर-ओ-बेरहमी है
ख़ुशगुमानी, कभी ग़लत फहमी है
उफ़्फ़! बंगाली आँखों की
हर इक अदा, तिलस्मी है

Banjar

मुहब्बत एक नशा है
मुहब्बत एक नशा भी है
दिल जिगर की बरबादी भी
जहाँ एक बार अफ़ीम हो जाए
वो ज़मीं बंजर हो जाती है

Paikar

अंधेरों की तरफ़ देख कर
अक्सर खामोशियाँ सुनता हूँ
कोई मेरे ख़्वाब का पैकर है
मै भी सपना किसी की आँख का हूँ

Jazbaat

जज़्बात ख़ामोशियों की हदें
तोड़ कर
आगे बढ़े

जिनके थे पर, वो बैठे रहे
जिनके न थे
बस वो उड़े

Dekho HameiN bhi

आँखों की अदाओं की रौनक़ ही और है
एक नज़र देखो हमें भी, बड़ा सख़्त दौर है

Ishq

धूप जलती तो हैं,
पर धुआँ नहीं होता
इश्क़ याद आ गया,
जैसे ही ये सोचा

Angdaai

झटके से ज़ुल्फ़ें खुलीं
अँगड़ाई जो उसने ली
ज़ुल्फ़ें तो बंध जाएँगी
पर क़यामत किधर जाएगी

Maraasim

शायरी की शक्ल में
हाल-ए-दिल, भिजवाता रहूँगा
तेरी यादों से बड़े मरासिम हैं
मै आता जाता रहूँगा

Aye Nazar

पलकों में पिघले सपनों का मलबा
अब जो सख़्त हो चला है
ए नज़र ज़रा बाहर देख के बता
शायद उसकी यादों का वक़्त हो चला है

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