Chaand Nazaakat Samete Hue

हुस्न-ओ-बहार की, चादर लपेटे हुए
मैंने चाँद देखा है, नज़ाकत समेटे हुए

Har Patthar ka Jawab

अभी उलझा हूँ दिल के पुर्ज़े सम्भालने में
मगर हर पत्थर का जवाब मै दूँगा ज़रूर